व्यक्ति की अभिवक्ति को यूँ चुटकी में मसल कर
बन गई राख, जीवन की मुस्कान आग में जल कर
समय की नीति में फँस कर, खोयी आशा की किरण
इस दलदल में धस कर, कठिन है दमन का चित्रण
क्षण क्षण प्रतिक्षण रूपांतरण, आमरण भीषण शोषण
अन्तःकरण में बहता अश्रु, शांति का नित्य चीरहरण
अन्तःकरण में बहता अश्रु, बिना स्वर, बिना आकार
आत्मा की सतह पर खिंचती एक अदृश्य धार

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